Posts

Showing posts from January, 2018

E=MC² magical formula of Albert Einstein

E=MC² magical formula of Albert Einstein आइंस्टाइन का समीकरण E=MC ² बेसबॉल टोपी से स्टिकर तक हर चीज़ पर काम करता है। यह 2008 के एक ‘मरीया कैरी एल्बम’ का भी शीर्षक है। लेकिन अल्बर्ट आइंस्टीन के इस प्रसिद्ध समीकरण का वास्तव में क्या मतलब है? बता दें कि इस समीकरण में ‘ E ' ऊर्जा को दर्शाता है और ‘ M द्रव्यमान को। यह समीकरण किसी पदार्थ की मात्रा का माप है और यह तो आपने पढ़ा ही होगा कि ऊर्जा और मैटर इंटरचेंजेबल होते हैं। इसके अलावा, यह याद रखना जरूरी है कि ब्रह्मांड में ऊर्जा या पदार्थ की एक निश्चित राशि होती है। अब हम समीकरण के C ² भाग तक पहुंच रहे हैं। सी प्रकाश की गति को दर्शाता है। यह एक सार्वभौमिक स्थिरांक है। इसके साथ पूरा समीकरा कुछ इस तरह से बनता है कि : E=MC 2 । आखिर ऊर्जा पैदा करने के लिए आपको प्रकाश की गति से बढ़ने की आवश्यकता क्यों होती है? कारण यह है कि ऊर्जा, प्रकाश की गति पर यात्रा करती है। वह 186,000 मील प्रति सेकंड (300,000 किलोमीटर प्रति सेकंड) पर चलती है। जब हम परमाणु ऊर्जा संयंत्र या एक परमाणु बम के अंदर परमाणु को विभाजित करते हैं, तो परिणामस्वरू...

तड़ित(Lightning)

तड़ित(Lightning) या "आकाशीय बिजली" वायुमण्डल में विद्युत आवेश का डिस्चार्ज होना (एक वस्तु से दूसरी पर स्थानान्तरण) और उससे उत्पन्न कड़कड़ाहट (thunder) को तड़ित कहते हैं।संसार में प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ 60 लाख तड़ित पैदा होते हैं।

विद्युत Electricity

Image
विद्युत Electricity विद्युत आवेशों के मौजूदगी और बहाव से जुड़े भौतिक परिघटनाओं के समुच्चय को विद्युत (Electricity) कहा जाता है। विद्युत से अनेक जानी-मानी घटनाएं जुड़ी है जैसे कि तडित स्थैतिक विद्युत, विद्युतचुम्बकीय प्रेरण, तथा विद्युत धारा। इसके अतिरिक्त, विद्युत के द्वारा ही वैद्युतचुम्बकीय तरंगो (जैसे रेडियो तरंग) का सृजन एवं प्राप्ति सम्भव होता है विद्युत के साथ चुम्बकत्व जुड़ी हुई घटना है। विद्युत आवेश वैद्युतचुम्बकीय क्षेत्र पैदा करते हैं। विद्युत क्षेत्र में रखे विद्युत आवेशों पर बल लगता है। समस्त विद्युत का आधार इलेक्ट्रॉन हैं। इलेक्ट्रानों के हस्तानान्तरण के कारण ही कोई वस्तु आवेशित होती है। आवेश की गति ही विद्युत धारा है। विद्युत के अनेक प्रभाव हैं जैसे चुम्बकीय क्षेत्र, ऊष्मा, रासायनिक प्रभाव आदि। जब विद्युत और चुम्बकत्व का एक साथ अध्ययन किया जाता है तो इसे विद्युत चुम्बकत्व कहते हैं। विद्युत को अनेकों प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है किन्तु सरल शब्दों में कहा जाये तो विद्युत आवेश की उपस्थिति तथा बहाव के परिणामस्वरूप उत्पन्न उस सामान्य अवस्था को विद्युत कहत...

शीत युद्ध का दौर

1.शीतयुद्ध द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के काल में संयुक्त राज्य अमेरिकाऔर सोवियत रूस के बीच उत्पन्न तनाव की स्थिति को शीत युद्ध के नाम से जाना जाता है। कुछ इतिहासकारों द्वारा इसे 'शस्त्र सज्जित शान्ति' का नाम भी दिया गया है। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन और रूस ने कंधे से कन्धा मिलाकर धूरी राष्ट्रों- जर्मनी, इटली औरजापान के विरूद्ध संघर्ष किया था। किन्तु युद्ध समाप्त होते ही, एक ओर ब्रिटेन तथा संयुक्त राज्य अमेरिका तथा दूसरी ओर सोवियत संघ में तीव्र मतभेद उत्पन्न होने लगा। बहुत जल्द ही इन मतभेदों ने तनाव की भयंकर स्थिति उत्पन्न कर दी। रूस के नेतृत्व में साम्यवादी और अमेरिका के नेतृत्व मेंपूँजीवादी देश दो खेमों में बँट गये। इन दोनों पक्षों में आपसी टकराहट आमने सामने कभी नहीं हुई, पर ये दोनों गुट इस प्रकार का वातावरण बनाते रहे कि युद्ध का खतरा सदा सामने दिखाई पड़ता रहता था। बर्लिन संकट, कोरिया युद्ध, सोवियत रूस द्वारा आणविक परीक्षण, सैनिक संगठन, हिन्द चीन की समस्या, यू-2 विमान काण्ड, क्यूबा मिसाइल संकटकुछ ऐसी परिस्थितियाँ थीं जिन्होंने शीतयुद्...

Sensor

Image
महत्वपूर्ण संवेदक(sensor) के नाम 1.अल्टीमीटर विमान की ऊंचाई 2.एनिमोमीटर वायु की गति 3.एवोमीटर रेडियो उत्पन्न दोष 4.एयरोमीटर वायु गैसों का भार और द्रव्यमान 5.ओडोमीटर परिवहन दूरी 6.बैरोमीटर वायु मंडलीय दाब 7.बोलोमीटर उष्मीय विविकरण यंत्र 8.बेरोग्राफ वायु परिवर्तन 9.क्रेस्कोग्राफ पौधे की वृद्धि दर्शाने 10.केलीपर्स बेलनाकार व्यास अंदर,बाहर 11.क्रोनोमीटर पानी के जहाज में समय 12.स्कुरगेज महीन तार का व्यास 13.स्टेथेस्कोप हृदय व फेफड़ो की आवाज सुनने के लिए 14.स्टीरियोस्कोप चित्र ,र्कैमरा 15.स्फेरोंमीटर वक्रता केन्द्र 16.स्फिग्मोफोन नाड़ी धड़कन की तेज आवाज़ 17.टैकोमीटर वायुयान गति 18.अल्ट्रासोनोंस्कोप मस्तिष्क के ट्यूमर ह्दयदोष 19.यूडोमीटर वर्षामापक 20.विस्कोमीटर द्रव्य की श्यानता 21.oneDग्राफ जेनरेटर उच्च विभवान्तर 22.वेंचुरीमीटर द्रव्य के प्रवाह की गति मापने हेतु 23.स्फ...

Ants

Image
ants चींटी के बारे में जानकारी जब भी हम एक कमजोर और छोटे प्राणी के बारे में सोचते हैं तो चींटी पहले आती है,लेकिन चींटी के जीवन के बारे में कुछ बुनियादी तथ्यों को जानने के बाद आपकी चींटियों के प्रति विचारधारा बदल जाएगी चींटी एक समाजिक कीट है इसकी 12,000 से अधिक प्रजातियों का वर्गीकरण किया जा चुका है जगत संघ -animalia वर्ग - insecta गण - hymenoptera अधिक कुल -Vespidae कुल: -Formicidae Latreille, 1809 1. दुनिया भर में चींटियों की करीब 12,000 प्रजातियां हैं 2. चींटी अपने वजन से 20 गुना ज्यादा वजन उठा सकती है 3. चींटियों में एक रानी चींटी होती है जिसके लाखों बच्चे होते हैं 4. चींटियों के कान नहीं होते वो जमीन के कम्पन से महसूस करती है 5. चींटियों में अगर लड़ाई हो जाये तो ये मरते दम तक चलती है 6. चींटियां हमेशा एक लाइन में चलती हैं ऐसा इसलिए क्योंकि सब चीटियां एक तरल पदार्थ छोड़ती जाती हैं जिससे पीछे वाली चींटी उसके पीछे चलती रहती है 7. रानी चींटी के पंख होते हैं 8. चीटियों के फेफड़े नहीं होते उनके श...

matter पदार्थ

रसायन विज्ञान और भौतिक विज्ञान में पदार्थ (matter) उसे कहते हैं जो स्थान घेरता है व जिसमे द्रव्यमान (mass) होता है। पदार्थ और ऊर्जा दो अलग-अलग वस्तुएं हैं। विज्ञानके आरम्भिक विकास के दिनों में ऐसा माना जाता था कि पदार्थ न तो उत्पन्न किया जा सकता है, न नष्ट ही किया जा सकता है, अर्थात् पदार्थ अविनाशी है। इसे पदार्थ की अविनाशिता का नियम कहा जाता था। किन्तु अब यह स्थापित हो गया है कि पदार्थ और ऊर्जा का परस्पर परिवर्तन सम्भव है। यह परिवर्तन आइन्स्टीन के प्रसिद्ध समीकरण E=mc 2 के अनुसार होता है। पदार्थ की मुख्य तीन अवस्थायें हैं - ठोस, द्रव तथा गैस। इसके अतिरिक्त कुछ विशेष परिस्थितियों में पदार्थ प्लाज्मा, अतितरल (सुपरफ्लुइड), अतिठोस आदि अन्य अवस्थायें भी ग्रहण करता है। पदार्थ की परिभाषा पदार्थ की आम परिभाषा है कि 'कुछ भी' जिसका कुछ-न-कुछ वजन (Mass) हो और कुछ-न-कुछ 'जगह घेरती' (Volume) हो उसे पदार्थ कहते है। उद्धरण के तौर पर, एककार जिसका वजन होता है और वह जगह भी घेरती है उसे पदार्थ कहेंगे। पदार्थ के कणों की विशेषताये पदार्थ के कण बहुत छोटे होते है। पदार्थ के कणों के ...

Plutonium प्लूटोनियम

Image
प्लूटोनियम Plutonium प्लूटोनियम एक दुर्लभ ट्रांसयूरेनिक रेडियोधर्मी तत्त्व है। इसका रासायनिक प्रतीक Pu और परमाणु भार 94 होता है। प्लूटोनियम के छः अपरूप होते हैं। यह एक ऐक्टिनाइड तत्त्व है जो दिखने में रुपहले श्वेत (सिल्वर व्हाइट) रंग का होता है। प्लूटोनियम-238 का अर्धायु काल 87.74 वर्ष होता है। प्लूटोनियम-239, प्लूटोनियम का एक महत्वपूर्ण समस्थानिक है जिसकी अर्धायु काल 24,100 वर्ष होता है। प्लूटोनियम-244, प्लूटोनियम का सर्वाधिक स्थाई समस्थानिक होता है। इसका अर्धायु काल 8 करोड़ वर्ष होता है। परिचय Indroduction प्लूटोनियम का आविष्कार परमाणु बम तैयार करने के समय 1940 ई. में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं में हुआ था। प्लूटो नामक ग्रह के नाम पर इसका नाम प्लूटोनियम (Plutonium) पड़ा। प्लूटोनियम के कईसमस्थानिक हैं, सभी संश्लेषण से प्राप्त हुए हैं और रेडियोऐक्टिव हैं। समस्थानिकों की द्रव्यमान संख्या उनकी प्राप्ति की विधि पर निर्भर करती है। सबसे अधिक समस्थानिक की द्रव्यमान संख्या 239 है। सबसे पहले जो समस्थानिम आवर्त सारणी के उस समूह में आता है जिस समूह में यूरेनियम और नेप्चू...